एमएमसीएच की बदहाल व्यवस्था बनी पलामू उपायुक्त के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान
पत्नी और बच्चा के मौत के जिम्मेवार डॉक्टर के खिलाफ कराएंगे एफ आई आर : मृतिका का पति पंचम कुमार
उमेश/ सफी/कमरुद्दीन
पलामू: मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एमएमसीएच) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय पर इलाज नहीं देने और अनुभवी डॉक्टरों की अनुपस्थिति का आरोप लगाया है।
मृतका की पहचान आरती देवी के रूप में हुई है। वह तीन बेटियों की मां थी और परिवार चौथे बच्चे के जन्म का इंतजार कर रहा था। लेकिन किस्मत ने ऐसा दर्दनाक मोड़ लिया कि बच्चा दुनिया देखने से पहले ही मां के गर्भ में दम तोड़ बैठा और कुछ ही देर बाद मां की भी मौत हो गई। अब घर में सिर्फ मातम, चीख-पुकार और तीन मासूम बेटियों की सूनी आंखें बची हैं।
मृतका के पति आशीष कुमार उर्फ पंचम ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शनिवार रात प्रसव पीड़ा बढ़ने पर वे पत्नी को सदर अस्पताल डाल्टेनगंज लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां न कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद था और न समय पर उचित इलाज मिला। आरोप है कि अनुभवहीन स्टाफ और प्रशिक्षु कर्मियों के भरोसे प्रसव कराने की कोशिश की गई, जिससे हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
*इलाज कराने गए थे, अस्पताल ने पत्नी और बच्चा दोनों छीन लिया — पंचम*
रोते-बिलखते पति पंचम ने कहा,
“हम अस्पताल इलाज कराने गए थे, लेकिन अस्पताल ने मेरी पत्नी और बच्चे दोनों को छीन लिया। अगर समय पर डॉक्टर रहते और सही इलाज होता तो शायद आज मेरा परिवार उजड़ा नहीं होता।”
घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। परिजन और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि एमएमसीएच में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यहां लापरवाही, अव्यवस्था और डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों की जिंदगी दांव पर लग जाती है।
*यह सिर्फ मौत नहीं, प्रशासनिक विफलता है, वार्ड पार्षद साहेब सिंह*
वार्ड पार्षद साहेब सिंह ने घटना को “प्रशासनिक विफलता” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मां और बच्चे की मौत नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना है।
उन्होंने मांग की कि दोषी डॉक्टरों, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में भी सिर्फ जांच के नाम पर लीपापोती हुई, तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी।
*मां की चिता पर गर्भ में पल रहा मासूम भी अग्नि में विलीन हो गया — पत्रकार संजय सिंह उमेश*
पत्रकार संजय सिंह उमेश ने इस घटना को बेहद मार्मिक बताते हुए कहा,
“इससे दुखद दृश्य और क्या हो सकता है कि जिस बच्चे ने अभी दुनिया देखी भी नहीं, वह अपनी मां के साथ चिता में अग्नि को समर्पित हो गया। अगर डॉक्टरों की लापरवाही नहीं होती तो शायद दो जिंदगियां बच सकती थीं।
*एमएमसीएच पर फिर उठे सवाल, अब उपायुक्त की कार्रवाई पर टिकी निगाहें*
घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर वर्षों से एमएमसीएच की बदहाल व्यवस्था को लेकर शिकायतें होने के बावजूद सुधार क्यों नहीं हो रहा। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अस्पताल में न पर्याप्त डॉक्टर हैं, न संसाधनों का सही इस्तेमाल और न जवाबदेही तय हो रही है।
लोगों का कहना है कि यदि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही प्रसूताएं सुरक्षित नहीं हैं, तो गरीब मरीज आखिर कहां जाएं?
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पलामू की स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब पूरे जिले की नजर पलामू के उपायुक्त पर टिकी है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस बार भी सिर्फ जांच कमेटी बनेगी, या फिर लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों पर ऐसी कार्रवाई होगी जो भविष्य में किसी और मां की जान बचा सके।

