भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर संस्थान के प्लैटिनम जुबिली वर्ष के अवसर पर वर्ष 2026 के लिए संस्थान के सभी अलेक्जेंडर वॉन हंबोल्ट (एवीएच) फेलोज की पहली बैठक आयोजित की गई। इस पहल को सहयोगात्मक शैक्षणिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में वरिष्ठ तथा युवा हंबोल्ट फेलोज ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक सहभागिता के विस्तार, संयुक्त शोध परियोजनाओं तथा दीर्घकालिक सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
संस्थान के बोर्डरूम में आयोजित इस सत्र को संस्थान के निदेशक एवं हंबोल्ट क्लब के अध्यक्ष सुमन चक्रवर्ती ने संबोधित किया और अध्यक्षता की। बैठक के दौरान वर्ष 2026–27 में चरणबद्ध रूप से लागू किए जाने वाले विभिन्न शैक्षणिक तथा सहयोगात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई।
इसी क्रम में हंबोल्ट क्लब के आईआईटी खड़गपुर चैप्टर की कार्यकारी समिति का पुनर्गठन प्रो. सुमन चक्रवर्ती के नेतृत्व में किया गया, जो स्वयं अलेक्ज़ेंडर वॉन हंबोल्ट फेलो हैं। संस्थान में वर्तमान में लगभग 50 एवीएच फेलोज सक्रिय हैं, जो आईआईटी खड़गपुर की मजबूत अंतरराष्ट्रीय शोध उपस्थिति और वैश्विक शैक्षणिक नेटवर्क में उसकी सक्रिय भूमिका को दर्शाते हैं।
नवगठित कार्यकारी समिति में अध्यक्ष के रूप में प्रो. सुमन चक्रवर्ती, सचिव के रूप में प्रो. किंसुक नस्कर तथा कोषाध्यक्ष के रूप में प्रो. शैलेंद्र के. वर्शनी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। संस्थान के अनुसार यह पुनर्गठन शोध सहयोग को संरचित रूप देने, युवा शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने तथा संयुक्त अकादमिक कार्यक्रमों को गति देने में सहायक होगा।
उल्लेखनीय है कि अलेक्ज़ेंडर वॉन हंबोल्ट फाउंडेशन का हंबोल्ट रिसर्च फेलोशिप कार्यक्रम विश्वभर के उत्कृष्ट पोस्टडॉक्टोरल और अनुभवी शोधकर्ताओं को जर्मनी में छह से 24 महीनों तक स्वतंत्र और दीर्घकालिक शोध का अवसर प्रदान करता है। सभी विषयों और राष्ट्रीयताओं के विद्वानों (जर्मनी को छोड़कर) के लिए खुली यह फेलोशिप उदार मासिक आर्थिक सहायता के साथ यात्रा भत्ता, पारिवारिक सहयोग, स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी और वैकल्पिक भाषा प्रशिक्षण जैसी सुविधाऐं उपलब्ध कराती है। वित्तपोषित शोध प्रवास के बाद फेलोज़ फाउंडेशन के प्रतिष्ठित वैश्विक पूर्व छात्र नेटवर्क का हिस्सा बनते हैं, जिससे दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत शैक्षणिक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।
संस्थान का मानना है कि प्लैटिनम जुबिली वर्ष के दौरान यह पहल वैश्विक अकादमिक साझेदारी को नई गति देने और शोध उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

