सुनवाई
के लिए रवाना होने से पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी ने सामाजिक माध्यम पर
अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्हें निर्वाचन आयोग से नोटिस
प्राप्त हुआ है, लेकिन उनके मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और पासपोर्ट भी
आयोग के लिए पर्याप्त नहीं माने गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में वे
भारत सरकार के निर्देश पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनियुक्ति पर यूरोप में
कार्यरत थे, जिसके चलते उस समय उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो सका।
उनके पास उस अवधि के राजनयिक पासपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध है।
मतदाता सूची विवाद को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ मुखर हुए तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर
कोलकाता: पश्चिम
बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले की डेबरा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस
विधायक और पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हुमायूं कबीर ने भारत
निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। मतदाता सूची
सत्यापन के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश पर उन्होंने तंज
कसते हुए कहा कि शायद आयोग को वे ‘रोहिंग्या’ प्रतीत हो रहे हैं।
हुमायूं
कबीर कोलकाता के कसबा क्षेत्र के निवासी हैं। शुक्रवार को कसबा विधानसभा
अंतर्गत रूबी पार्क स्थित एक विद्यालय में उनकी सुनवाई निर्धारित थी। वर्ष
2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था, जबकि परिवार के अन्य
सदस्यों के नाम सूची में मौजूद थे। इसी विसंगति को लेकर निर्वाचन आयोग की
ओर से उन्हें साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का नोटिस भेजा गया था।
