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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में अचला सप्तमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब



वाराणसी:  माघ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी (अचला सप्तमी) पर रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाबा के पावन ज्योर्तिलिंग की मंगलाआरती के बाद दरबार में श्रद्धालुओं का अटूट कतार दर्शन पूजन में जुटी रही। श्री काशी विश्वनाथ दरबार के साथ दशाश्वमेध, बांसफाटक, ज्ञानवापी मोड़, चौक, बुलानाला का पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं के सैलाब से पट गया है।


मंदिर जाने वाले मार्ग पर सुगम यातायात के लिए जिला प्रशासन को जूझना पड़ रहा है। प्रयागराज माघ मेले से श्रद्धालुओं के पलट प्रवाह ( लौट रहे श्रद्धालुओं) के चलते बाबा के दरबार में मंदिर प्रशासन ने तीन दिनों के लिए स्पर्श दर्शन पर रोक लगाकर झांकी दर्शन की व्यवस्था की है। भीड़ को देखते हुए यातायात प्रतिबंध लागू किया गया है। मंदिर जाने वाले मार्ग को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है।


बीते शनिवार को मंदिर में बाबा के शयन आरती तक यही नजारा दिखा। प्रयागराज से वसंत पंचमी पर्व पर स्नान के बाद लौट रहे श्रद्धालु काशी में दशाश्वमेध और आसपास के घाटों पर गंगा में पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं, इसके पश्चात सभी बाबा विश्वनाथ के दर्शन को कतारों में लगकर पहुंच रहे हैं। बाबा के दरबार में उमड़ रहे जनसैलाब को देेखते हुए बाबा दरबार की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर यातायात प्रबंधन किया गया है। मैदागिन से बाबा दरबार तक और गिरजाघर चौराहे से गोदौलिया चौराहे तक नो व्हीकिल जोन घोषित कर दिया गया है।


मंदिर न्यास के अनुसार बीते शनिवार को भोर में बाबा की मंगला आरती के बाद से रात 11 बजे शयन आरती तक लगभग तीन लाख भक्तों ने दर्शन पूजन किया। ज्योतिषविद रविन्द्र तिवारी के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी कहा जाता है, इसे पूरे वर्ष भर की सप्तमियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अचला सप्तमी शनिवार देर रात 12 बजकर 40 मिनट से शुरू हो गई है। अचला सप्तमी के दिन भगवान सूर्य के उपासना का विधान है। सप्तमी पर सूर्योदय से पूर्व ही श्रद्धालु पवित्र नदियों या तीर्थकुंड में स्नान दान के बाद पुण्य का भागी बनते है। भविष्य पुराण के अनुसार आज के दिन भगवान सूर्य का ब्रत रखने से सुख, सौभाग्य, रूप, यश और उत्तम सन्तान की प्राप्ति होती है।