इसी प्ररिप्रैक्ष्य में आज मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि जमीन की समय पर मापी नहीं होने के कारण अनावश्यक भूमि विवाद उत्पन्न होते हैं। ऐसे में ‘सबका सम्मान-जीवन आसान‘ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भूमि मापी की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं नागरिक अनुकूल बनाने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर मंगलवार सुबह पोस्ट कर कहा कि 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी के लिए लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर कर दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 7 कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी तथा विवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 11 कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अविवादित तथा विवादित जमीन की निर्धारित कार्य दिवस में मापी की प्रक्रिया पूर्ण कर अमीन द्वारा मापी का प्रतिवेदन मापी के पश्चात आवेदक के आवेदन की तिथि के 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा के अंदर जमीन मापी सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा आवश्यक कर्मचारियों एवं संसाधनों की व्यवस्था के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया के गहन पर्यवेक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
नीतीश कुमार ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन मापी प्रक्रिया को सरल बनाने से संबंधित यह पहल समस्त प्रदेशवासियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी और उनका दैनिक जीवन और भी आसान हो सकेगा। उन्होंने इसके लिए जनता से सुझाव भी मांगे।
भूमि मापी की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं नागरिक अनुकूल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री
पटना, बिहार सरकार जमीन संबंधी विवाद के निपाटरे को लेकर सात निश्चय-3 (2025-30) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान‘ को लेकर काफी सजग है।
