BREAKING NEWS

logo

राजस्थान में पीएमकेवीवाई के तहत 3 लाख से ज्‍यादा लोगों को ट्रेनिंग दी गई


नई दिल्‍ली केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने शुक्रवार को राजस्थान सरकार के साथ कौशल विकास एवं रोजगार संबंधी पहलों की समीक्षा बैठक की। बैठक में राजस्थान सरकार के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग मंत्री कर्नल राजवर्धन राठौर भी उपस्थित थे।

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के मुताबिक बैठक में प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र-राज्य सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया गया। भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में राजस्थान एक प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है, जिसके पास देश के सबसे बड़े औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नेटवर्क में से एक है, जिसमें 182 सरकारी एवं 1,355 निजी संस्थानों सहित 1,537 आईटीआई शामिल हैं। 


प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0 के तहत राज्य में 3.14 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित यानी अभिविन्‍यास उन्‍मुख किया गया है, जिनमें से 2.50 लाख से अधिक को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया है। 

राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के तहत शिक्षुता कार्यक्रम में 1,211 संस्थानों में 1.04 लाख से ज्यादा प्रशिक्षु शामिल हो चुके हैं और 31 जनवरी 2026 तक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए 24.98 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है। इसके अलावा पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 2.51 लाख से अधिक कारीगरों का मूल्यांकन किया गया है। वहीं, नौ जिलों में कार्यरत जन शिक्षण संस्थानों (जेएसएस) ने लगभग 12,000 उम्मीदवारों को नामांकित किया है, जिसमें उच्च प्रमाणन दर है।

मंत्रालय के मुताबिक बैठक में चर्चा का एक प्रमुख विषय राजस्थान में दो स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (एसआईआईसी) की स्थापना एवं पीएम स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना का कार्यान्वयन था। 

राजस्थान ने क्षेत्रीय औद्योगिक मांग के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से हब-एंड-स्पोक मॉडल को लागू करने के लिए भरतपुर, भिवाड़ी, जयपुर, बालोतरा, कोटा, बीकानेर, जोधपुर एवं बांसवाड़ा सहित विभिन्न जिलों में प्रमुख आईटीआई क्लस्टरों की पहचान की है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर, पीएम-सेतु के लिए पांच वर्षों में कुल 60,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसका उद्देश्य 1,000 आईटीआई और पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) का उन्नयन करना है, जिससे 20 लाख युवाओं को आधुनिक एवं उभरते व्यवसायों में कुशल बनाया जा सके।

इस अवसर पर जयंत चौधरी ने कहा कि राजस्थान का विशाल आकार एवं संस्थागत मजबूती राज्य को भारत के कौशल विकास परिवर्तन में अग्रणी बनाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अगले चरण में गुणवत्ता बढ़ाने, उद्योग साझेदारी को मजबूत करने एवं रोजगार के ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएम-सेतु के अंतर्गत आईटीआई का रूपांतरण, शिक्षुता कार्यक्रमों में भागीदारी का विस्तार एवं अंतरराष्ट्रीय कौशल विकास केंद्रों की स्थापना से राजस्थान के युवाओं को घरेलू एवं वैश्विक स्तरीय प्रतिस्पर्धा में सहायता मिलेगी। उन्होंने पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत समर्थित पारंपरिक क्षेत्रों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी सर्विसिंग और डिजिटल प्रौद्योगिकियों जैसे भविष्य के कौशल को जोड़ने के महत्व पर भी बल दिया, जिससे राज्य की विकास रणनीति में विरासत एवं नवाचार को एकीकृत किया जा सके।

कर्नल राजवर्धन राठौर ने कौशल विकास प्रणाली में सुधारों को गति देने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने पुष्टि किया कि राजस्थान अवसंरचना विकास में तेजी लाने, आवश्यकतानुसार भूमि आवंटन की सुविधा प्रदान करने और पीएमकेवीवाई 4.0 और पीएम-सेतु के अंतर्गत मजबूत निगरानी तंत्र सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग करेगा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएमकेवीवाई के अंतर्गत तीन लाख से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है और एक लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को रोजगार दिया गया है, जिससे राज्य ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोकेमिकल्स, हस्तशिल्प एवं निर्यात उन्मुख उद्योगों जैसे क्षेत्रों के अनुरूप कुशल कार्यबल को निरंतर तैयार कर रहा है।

इस बैठक में भरतपुर में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई) की स्थापना और जयपुर एवं जोधपुर स्थित एनएसटीआई (महिला) के उन्नयन के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई। विदेशों में रोजगार एवं वैश्विक कार्यबल की गतिशीलता के लिए सुव्यवस्थित मार्ग तैयार करने के लिए जयपुर एवं भरतपुर में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना पर भी चर्चा हुई।

समीक्षा बैठक समाप्त होने पर केंद्र और राजस्थान की दोनों सरकारों ने लंबित स्वीकृतियों में तेजी लाने, निगरानी एवं शासन संरचना को मजबूत करने और रोजगार से जुड़े परिणामों को बेहतर बनाने के लिए उद्योग के साथ मजबूत सहयोग स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। विचार-विमर्श में भविष्य के लिए तैयार, समावेशी एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई जिसमें भारत के कौशल विकास मिशन को आगे बढ़ाने में राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है।