नई
दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01
फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। सीतारमण के कार्यकाल
का नौवां और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 3.0 सरकार का तीसरा पूर्ण
बजट होगा। यह बजट 'विकसित भारत 2047' के विजन के साथ लंबी अवधि के विकास,
राजकोषीय स्थिरता, बुनियादी ढांचे और डिजिटल विकास पर केंद्रित होने की
उम्मीद है, जिसमें आम जनता के लिए कर राहत और कृषि-केंद्रित उपायों पर
विशेष जोर दिए जाने की संभावना है।
केंद्रीय बजट 01 फरवरी, रविवार
को सुबह 11 बजे लोकसभा में पेश होगा। इस बार संसद का बजट सत्र 28 जनवरी
को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। 29 जनवरी को संसद में आर्थिक
सवेक्षण 2025-26 पेश किया जाएगा।
बजट से उम्मीदें-
आयकर
में बदलाव: करदाताओं को इस बार के बजट से नई आयकर प्रणाली में बदलाव, मानक
कटौती में वृद्धि और मध्यम वर्ग के लिए टैक्स राहत की उम्मीद है।
कृषि
एवं ग्रामीण विकास: किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण सीमा बढ़ाने,
महिला किसानों के लिए योजनाओं और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
बुनियादी
ढांचा और विनिर्माण: 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए
उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
जारी रह सकता है।
शिक्षा और कौशल: इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा
देने के लिए उच्च शिक्षा में सीटों की वृद्धि और डिजिटल शिक्षा पर जोर रहने
की संभावना है।
बजट बनाने की प्रक्रिया-
वित्त मंत्रालय द्वारा केंद्र सरकार के सभी विभागों से अनुमान मांगे जाते हैं, जो आमतौर पर अगस्त/सितंबर में शुरू होता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों और ट्रेड यूनियनों के साथ प्री-बजट बैठकें करती हैं।
केंद्रीय बजट दस्तावेजों की छपाई से पहले पारंपरिक हलवा सेरेमनी, जो गोपनीयता का प्रतीक है।
अधिकारी बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए नॉर्थ ब्लॉक में लॉक-इन अवधि के दौरान रहते हैं।
बही-खाता-
यह
पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह बजट दस्तावेजों को ले जाने का आधुनिक लाल-रंग का
बही-खाता है, जिसे वित्त मंत्री सीतारमण ने शुरू किया है।
उल्लेखनीय
है कि केंदीय बजट 2026-27 पूरे वित्त वर्ष के लिए एक पूर्ण बजट है। बजट
भाषण संसद टीवी, यूट्यूब, फेसबुक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न
न्यूज एजेंसियों और न्यूज चैनलों पर लाइव देखा जा सकता है। बजट के माध्यम
से सरकार का मुख्य उद्देश्य राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक
विकास को गति देना है।