गिद्धेश्वर की कंदराओं में मिले नवपाषाण काल के शैल चित्र,
जमुई की पहाड़ियों में मिला इतिहास का अनमोल खजाना
•आदिमानव के जीवन के खुले राज•
मुकेश कुमार/ब्यूरो चीफ
पटना(बिहार)।बिहार के जमुई जिले ने आज पुरातात्विक इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।जमुई वन प्रमंडल द्वारा किए गए एक विशेष अन्वेषण में गिद्धेश्वर की पहाड़ियों में स्थित शैलाश्रयों(Rock Shelters)से प्राचीन शैल चित्रों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।ये चित्र नवपाषाण काल(Neolithic Age) से लेकर प्रारंभिक ऐतिहासिक काल तक के बताए जा रहे हैं।
•डीएफओ के नेतृत्व में बड़ी सफलता•
जमुई के डीएफओ तेजस जायसवाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने इन दुर्लभ चित्रों का सफलतापूर्वक अन्वेषण और अभिलेखन किया है। टीम में फॉरेस्टर मिथिलेश कुमार,वनरक्षक दीपु रविदास और धीरेंद्र कुमार सहित कई अन्य कर्मी शामिल थे।
••क्या है इन चित्रों की खासियत?•
सर्वेक्षण के दौरान पहाड़ियों की गुफाओं में मानव गतिविधियों और वन्यजीवों से संबंधित कई आकृतियां मिली हैं।डीएफओ तेजस जायसवाल ने इस खोज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये चित्र उस दौर के हैं जब लिखित इतिहास मौजूद नहीं था।नवपाषाण काल(लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व)के ये साक्ष्य दर्शाते हैं कि यहां का मानव स्थायी निवास,कृषि और पशुपालन से जुड़ चुका था।
••कलात्मक अभिव्यक्ति•
आदिमानव ने अपने जीवन,संघर्ष और परिवेश को इन चट्टानों पर चित्रों के माध्यम से उकेरा है।
•विरासत का संरक्षण•
यह खोज न केवल जमुई बल्कि पूरे बिहार के गौरवशाली इतिहास को उजागर करती है।
["यह खोज क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत का जीवंत प्रमाण है।वन प्रमंडल इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने और इसे पर्यटन व शोध की दृष्टि से प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।"—तेजस जायसवाल,डीएफओ,जमुई]
पर्यटन और शोध को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि गिद्धेश्वर की पहाड़ियों में मिले ये साक्ष्य भविष्य में इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।वन विभाग अब इन क्षेत्रों की सुरक्षा और इन चित्रों के दस्तावेजीकरण पर विशेष ध्यान दे रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को पहचान सकें।
जमुई के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है,जो हमें हज़ारों साल पीछे की सभ्यता से सीधे जोड़ता है।

