दावोस
(स्विट्जरलैंड): अमेरिका फिलहाल ग्रीनलैंड को हासिल
करने के लिए यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हट गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने यह फैसला उत्तरी अटलांटिक संधि
संगठन (नाटो) महासचिव मार्क रुटे के साथ आर्कटिक सुरक्षा को लेकर भविष्य के
समझौते के एक ढांचे पर सहमति बनने के बाद लिया।
वाशिंगटन में दो राजनयिक सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपित
का यह कदम 1951 के अमेरिकी समझौते से परे ग्रीनलैंड की सुरक्षा को बढ़ाएगा।
यह रूस और चीन को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोकेगा। नाटो की प्रवक्ता
एलिसन हार्ट ने कहा कि ट्रंप और महासचिव की बैठक बहुत ही सार्थक रही। अब
डेनमार्क, ग्रीनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ेगी।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रूस और चीन कभी भी ग्रीनलैंड में आर्थिक
या सैन्य रूप से अपनी पकड़ न बना पाएं।
इससे
कुछ दिन पहले राष्ट्रपति ने आठ यूरोपीय देशों पर 10 फीसद टैरिफ लगाने की
धमकी दी थी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर अमेरिका द्वीप हासिल नहीं कर पाया
तो टैरिफ बढ़कर 25 फीसद हो जाएगा। लंबे समय से सहयोगी रहे देशों के साथ
व्यापार युद्ध की धमकी से यूरोपीय देशों की राजधानियों में हलचल मच गई।
नेता दावोस में इकट्ठा होने से पहले इस खतरे से निपटने और ग्रीनलैंड और
डेनमार्क की स्वायत्तता का बचाव करने में जुट गए थे। इसमें उन्हें काफी हद
तक सफलता मिल गई है।
यूरोपीय देशों पर अमेरिका टैरिफ नहीं लगाएगा, ग्रीनलैंड पर ट्रंप के तेवर पड़े नरम
सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने
कहा, "हमारे पास एक सौदे का आकार है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका और उनके लिए
भी एक बहुत अच्छा सौदा होगा।" उन्होंने कहा, "हम आर्कटिक और ग्रीनलैंड के
संबंध में एक साथ काम करने जा रहे हैं।और इसका संबंध मजबूत सुरक्षा और अन्य
चीजों से है।" ट्रंप ने कहा, "यह उस तरह का समझौता है, जिसे मैं करना
चाहता था।"
राष्ट्रपति ट्रंप ने दिन
में पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में वैश्विक नेताओं की सालाना बैठक को
संबोधित किया और इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा कारणों से अमेरिका को
डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र का मालिक होना चाहिए। लेकिन, पहली बार,
उन्होंने द्वीप पर नियंत्रण करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार
किया और कहा कि वह इसके बजाय क्षेत्र पर "तत्काल बातचीत" करना चाहते हैं।
