इनसाइड स्टोरी
#बीएंडके क्षेत्र के एकेके (खासमहल) प्रोजेक्ट में सप्लाई चेन पर सवाल!
"आर ओ एम" के दस्तावेज पर, "स्टीम कोयला" लोड?#
बेरमो:
झारखंड में #सेंट्रल कोलफील्ड इंडिया (सीसीएल) के बोकारो एंड कारगली (बीएंडके) प्रक्षेत्र स्थित एकेके (खासमहल) प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ परिवहन रिकॉर्ड और मंडी स्रोतों के विश्लेषण में यह प्रश्न उभर कर सामने आया है कि आर ओ एम (रन ऑफ माईन) के दस्तावेज़ों पर प्रोसेस्ड ‘स्टीम कोयले’ की लोडिंग कर राज्य से बाहर बिक्री की जा रही है।सुत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एकेके परियोजना में कुछ खास लोडिंग प्वाइंट मसलन लोडिंग प्वाइंट नंबर 28,30,34,35 से धड़ल्ले से स्टीम कोयला लोड कर बाहर व्यवसायिक मंडियों में भेजा जा रहा है।सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना प्रबंधन की सहमति के ये संभव नहीं है और सहमति का आधार सिर्फ और सिर्फ पैसा है।विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इस प्रक्रिया में प्रबंधन में कार्यरत मुंशी से लेकर सेल ऑफिसर, परियोजना पदाधिकारी तक प्रति ट्रक 5000/-रु से लेकर 10,000/-रु तक उनके ओहदे के अनुसार हिस्सा तय है।निश्चित रुप से इसके हिस्सेदार ऊपरी ओहदेदार भी कोयले के इस काले कारनामे में सम्मिलित होंगे क्योंकि जबतक ऊपर का तंत्र भ्रष्ट नहीं होगा तबतक अधिनस्थ कर्मचारियों की हिम्मत नहीं होगी देश के राजस्व की खुलेआम लूट में शामिल होने की!
प्रबंधन को मैनेज करने के नाम पर ये राशि बाँटने की जिम्मेवारी कुछ दलालों की है जो कि
एकेके परियोजना के करीब स्थित बरवाबेड़ा बस्ती में रहते हैं जिनके परिजन सीसीएलकर्मी हैं और इसी प्रोजेक्ट में नियोजित हैं, उनके सहयोग से स्टीम कोयले को इन खास लोडिंग प्वाइंट्स पर एकत्र किया जाता है जिसे इन कथित दलालों द्वारा जो की कोयला व्यवसायी भी हैं, अपने ट्रकों में लोड कर बाहर मंड़ियों में ले जाकर ऊँचे मुल्यों में बेचा जाता है।
इस संबंध में प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए एकेके परियोजना पदाधिकारी के मोबाईल पर संपर्क करने की काफी कोशिशें की गई लेकिन उनके मोबाईल का स्विच ऑफ ही आता रहा।
नियमानुसार आर ओ एम की प्रोसेसिंग (सीएचपी/स्क्रीनिंग) में होने के बाद ग्रेड का निर्धारण कर स्टीम कोल के रूप में डिस्पैच करने का प्रावधान है।
यहाँ जांच का विषय है कि: क्या दर्ज स्टीम कोल के डिस्पैच मात्रा, उसी अवधि में उपलब्ध प्रोसेसिंग क्षमता और बिजली खपत डेटा से मेल खाती है?
क्या आर ओ एम और स्टीम कोल के ट्रांज़िट दस्तावेज़ों में वर्गीकरण परिवर्तन का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध है?
खनन क्षेत्र के एक पूर्व तकनीकी अधिकारी के अनुसार:“आर ओ एम" और "स्टीम कोयले" के वर्गीकरण में यदि व्यवस्थित अंतर पाया जाता है तो यह सप्लाई चेन ट्रैकिंग सिस्टम की समीक्षा का विषय हो सकता है। इसकी पुष्टि डेटा ऑडिट और भौतिक सत्यापन से ही संभव है।
खनन शासन प्रणाली से जुड़े एक पूर्व अधिकारी के अनुसार:
“कोयला डिस्पैच एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया है। यदि वर्गीकरण या प्रोसेसिंग में व्यवस्थित अंतर पाया जाता है तो केवल फील्ड स्तर नहीं बल्कि प्रशासनिक पर्यवेक्षण तंत्र की भी समीक्षा आवश्यक होती है।”
बहरहाल, सीसीएल के बी एंड के प्रक्षेत्र से सरकारी राजस्व की लूट का एकेके परियोजना तो एक छोटा उदाहरण है,अन्य परियोजनाओं व प्रक्षेत्रों की इनसाइड स्टोरी अगले अंक में....

