कानपुर, । यूं तो शहर में देवी मां के कई मंदिर स्थापित है। जहां
रोजाना की अपेक्षा नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ कई गुना बढ़
जाती है। ऐसा ही फीलखाना स्थित मां तपेश्वरी देवी का मंदिर है। जहां एक
साथ चार देवियां विराजमान हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन कर हाजरी
लगाने से निसंतान महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। यही नही मंदिर प्रांगण
में छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार और भी कई तरह के मांगलिक कार्यक्रम भी
किये जाते हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर से जुड़े कई रहस्य भी हैं। जिसे लेकर
पुजारी शिव मंगल ने बुधवार को अहम जानकारियां साझा की है।
मंदिर के
पुजारी शिव मंगल ने बताया कि इस का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
मंदिर में चार देवियां मां सीता, कमला, विमला और सरस्वती विराजमान हैं। मां
सीता ने बिठूर से यहां पर आकर तप किया था। यही नही लव कुश का मुंडन
संस्कार भी इसी मंदिर प्रांगण में कराया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही
है। आज भी यहां मुंडन संस्कार के साथ-साथ और भी मांगलिक कार्यक्रम किये
जाते हैं। मान्यता है कि यदि निसंतान महिलाये माता रानी के नियमति दर्शन कर
हाजरी लगातीं हैं। तो उन्हें जल्द ही संतान की प्राप्ति होती है।
मुराद
पूरी होने के बाद मंदिर प्रांगण में ही भक्त अखण्ड ज्योत भी जलाते हैं।
जिसके लिए नवरात्रि के एक दिन पहले मंदिर कमेटी से मिलकर बुकिंग कराई जाती
है। यह ज्योत नवरात्रि की शुरुआत से नवमीं तक निरंतर जलती रहती है।
आगे
उन्होंने बताया कि मंदिर में मां सीता के साथ विमला, कमला और सरस्वती भी
तप किया करती थीं लेकिन आज भी यह रहस्य बना हुआ है कि चारों देवियों में
मां सीता की मूर्ति कौन सी है?
यही कारण है कि इस मंदिर में
नवरात्रि के दिनों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है। जहां भक्त कानपुर
ही नहीं बल्कि उसके आसपास के जिलों से भी माता रानी के दर्शन करने के लिए
आते हैं।
शहर का एक ऐसा देवी मंदिर जहां दर्शन करने से होती है संतान की प्राप्ति रामायण काल और मां सीता के तप से जुड़ा है यह रहस्यमयी मंदिर
