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बीएनएमयू कुलपति के बयान पर अभाविप का हमला, सेमिनार स्थगन को बताया तानाशाही


सुपौल में बीएनएमयू (भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय) मधेपुरा के कुलपति के प्रेस बयान को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। परिषद के नेताओं ने कुलपति के बयान को हास्यास्पद बताते हुए सेमिनार आयोजन और वक्ता चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

अभाविप के प्रांत सह मंत्री शिवजी कुमार ने कहा कि कुलपति द्वारा प्रेस में कही गई बातें उचित प्रतीत नहीं होतीं। उनका आरोप है कि कुलपति ने पारदर्शी प्रक्रिया की बात कही, जबकि स्वयं यह भी स्वीकार किया कि वक्ता का चयन उनकी अनुमति के बिना हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विश्वविद्यालय में वक्ता चयन बिना कुलपति की अनुमति के किया जाना तय प्रक्रिया है।

परिषद ने स्पष्ट कहा कि यदि ऐसी प्रक्रिया है तो वह इसका विरोध करेगी और कुलपति से माफी की अपेक्षा रखती है। इसके साथ ही पीएम उषा योजना के तहत आयोजित सभी सेमिनारों को स्थगित करने के निर्णय को अभाविप ने तानाशाही रवैया करार दिया है। उनका कहना है कि एक वक्ता पर आपत्ति के कारण सभी सेमिनार स्थगित करना छात्र विरोधी कदम है।

अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी सेमिनारों की नई तिथियां घोषित की जाएं। इस दौरान रंजीत झा, राजेश कुमार सहित परिषद के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।