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PCOD में नींद आने में क्यों होती है और मुश्किल?


रांची: COD और PCOS को अक्सर सिर्फ पीरियड्स या फर्टिलिटी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका असर महिलाओं के पूरे शरीर पर होता है। अगर आप सोच रही हैं कि सिर्फ पीरियड्स का अनियमित होना या हैवी होना ही पीसीओडी का संकेत है, तो आप गलत हैं। इन कंडीशन्स में वजन बढ़ना, बालों का झड़ना, बेली फैट बढ़ना और डाइजेशन का खराब होना जैसी दिक्कतें भी होती हैं। इतना ही नहीं, इसका असर महिलाओं की स्लीप साइकिल पर भी होता है। आमतौर पर PCOD और PCOS से परेशान महिलाओं को नींद आने में मुश्किल होती है।

PCOD और PCOS में नींद आने में मुश्किल क्यों होती है?

PCOD और PCOS में शरीर में एंड्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है। दरअसल इसमें शरीर में हैप्पी हार्मोन कम और स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल ज्यादा होने लगता है और इसकी वजह से नींद आने में मुश्किल होती है। मोटापे की वजह से भी इन हेल्थ कंडीशन्स में महिलाओं को नींद सही से नहीं आती है।

COS की वजह से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने लगता है। इसके कारण नींद नहीं आती है और अगर आती भी है तो स्लीप क्वालिटी अच्छी नहीं रहती है।

COS की वजह से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने लगता है। इसके कारण नींद नहीं आती है और अगर आती भी है तो स्लीप क्वालिटी अच्छी नहीं रहती है।

डाइट में मैग्नीशियम और ओमेगा-3 से भरपूर नट्स और सीड्स को शामिल करें। इनसे कोर्टिसोल कम होता है और दिमाग शांत होता है, जिससे अच्छी नींद आने में मदद मिलती है। चिया सीड्स, कद्दू के बीज, बादाम और अखरोट जरूर खाएं।

स्ट्रेस और एंड्रोजन कम करने वाले हर्ब्स भी आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। इनसे मेलाटोनिन बढ़ता है। अश्वगंधा, जायफल, सौंफ के बीज और केसर फायदेमंद रहेगा।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर सब्जियां मेलाटोनिन को बढ़ाती हैं। केला, चेरीज और मेथी की पत्तियों को डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं। PCOD का संबंध सिर्फ महिलाओं की फर्टिलिटी से नहीं है।